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traveldiaries #क्यूँ छूटती हैं वो बाहें जिनमें हम झूलना चाहते हैं ... न नगर पता मान हिंदी कविता तुम्हारा पता पढ़ता चला बदलाव न रुकेंगे जिसपे चलना चाहते हैं मानवता ट्रॅव्हलडायरी किस्मत चला जीवन पढ़ता चला गया बढ़ता चला गया मन न डगर पता माँ

Hindi पता न चला Poems