STORYMIRROR

बढ़ता चला गया किस्मत झुकेंगे चला जिसपे चलना चाहते हैं बदलाव मन ट्रॅव्हलडायरी माँ मानवता हिंदी कविता न डगर पता पढ़ता चला गया पढ़ता चला मान तुम्हारा पता #क्यूँ छूटती हैं वो बाहें जिनमें हम झूलना चाहते हैं ... न नगर पता न रुकेंगे जीवन

Hindi पता न चला Poems